जिला प्रेस क्लब सह वाचनालय में छात्रों से रूबरू हुए कलेक्टर, यूपीएससी-पीएससी की तैयारी के अपने अनुभव किए साझा।।।

जिला प्रेस क्लब सह वाचनालय में छात्रों से रूबरू हुए कलेक्टर, यूपीएससी-पीएससी की तैयारी के अपने अनुभव किए साझा।।।

पसीना जितना तैयारी में बहाओगे, परीक्षा कक्ष में उतनी ही सफलता मिलेगी" — कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन।।

सिलेबस नहीं, रणनीति और निरंतर अभ्यास सफलता की कुंजी; प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए कलेक्टर ने दिए सफलता के मंत्र।।।

पेंड्रा। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए जिला प्रेस क्लब सह वाचनालय, पेंड्रा में एक प्रेरणादायी संवाद का आयोजन हुआ। जिले के कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने यहां अध्ययनरत छात्र-छात्राओं से आत्मीय मुलाकात कर न केवल अपने छात्र जीवन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के अनुभव साझा किए, बल्कि सफलता प्राप्त करने के व्यावहारिक गुर भी बताए। कलेक्टर को बेहद सहज और आत्मीय अंदाज में अपने बीच पाकर छात्र-छात्राओं में खासा उत्साह देखने को मिला।।।

वहीं अपने संबोधन में जिला कलेक्टर डॉ. देवांगन ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के लिए सबसे अधिक आवश्यकता समर्पण, अनुशासन और निरंतर अभ्यास की होती है। उन्होंने बताया कि जब वे स्वयं यूपीएससी और पीएससी की तैयारी कर रहे थे, तब लिखने का निरंतर अभ्यास करते थे। उस समय परीक्षाओं में लंबे उत्तर लिखने पड़ते थे, इसलिए रोजाना कई घंटों तक उत्तर लेखन का अभ्यास किया जाता था।।।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि परीक्षा केवल ज्ञान की नहीं बल्कि शारीरिक और मानसिक सहनशक्ति की भी परीक्षा होती है। इसलिए परीक्षा के अनुरूप खुद को तैयार करना जरूरी है। उन्होंने सलाह दी कि अभ्यर्थी तीन-तीन घंटे के दो सत्रों में बैठकर उत्तर लेखन का अभ्यास करें, ताकि परीक्षा के दिन लगातार तीन घंटे बैठकर लिखना सहज लगे। कलेक्टर ने कहा कि अधिकांश विद्यार्थी पूरे सिलेबस को देखकर घबरा जाते हैं, जबकि सिलेबस बड़ा जरूर होता है, लेकिन यदि उसका सही नियोजन किया जाए तो वह बोझिल नहीं लगता। 

उन्होंने कहा कि तैयारी बिना योजना के नहीं, बल्कि स्पष्ट रणनीति के साथ करनी चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि "पसीना मेहनत में जितना बहाओगे, परीक्षा कक्ष में उतनी ही सफलता मिलेगी।" मेहनत का कोई विकल्प नहीं है और निरंतर अभ्यास ही आत्मविश्वास बढ़ाता है।  डॉ. देवांगन ने कहा कि अपनी कमियों को जितनी जल्दी पहचान लिया जाए, सफलता उतनी ही जल्दी मिलती है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी कमजोरियों का ईमानदारी से विश्लेषण कर उन्हें दूर करने की सलाह दी।।।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में कई बार ऐसे प्रश्न पूछे जाते हैं जो हमारी सोच से परे होते हैं, इसलिए केवल रटने की बजाय विषय की गहरी समझ विकसित करना आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सफलता केवल लंबे समय तक पढ़ने से नहीं मिलती। हर विद्यार्थी की सीखने और याद रखने की क्षमता अलग होती है। इसलिए जरूरी यह नहीं कि 10-12 घंटे पढ़ा जाए, बल्कि यह है कि जितना भी पढ़ें, पूरी रुचि और एकाग्रता के साथ पढ़ें। पढ़ाई कभी बोझ नहीं लगनी चाहिए बल्कि सीखने का आनंद देना चाहिए।।।।

कलेक्टर ने विद्यार्थियों से कहा कि स्वयं को दूसरों से नहीं बल्कि अपने पिछले प्रदर्शन से बेहतर बनाने का लक्ष्य रखें। इसके लिए कुछ निश्चित मापदंड तय करें और नियमित रूप से अपनी प्रगति का मूल्यांकन करें। उन्होंने बताया कि तैयारी के दौरान कुछ ऐसी तकनीकें विकसित करनी चाहिए जो हर परिस्थिति में उपयोगी साबित हों। संवाद के दौरान छात्र-छात्राओं ने भी प्रतियोगी परीक्षाओं, समय प्रबंधन, उत्तर लेखन, आत्मविश्वास और अध्ययन पद्धति से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे, जिनका कलेक्टर ने अपने अनुभवों के आधार पर सरल और प्रेरक ढंग से उत्तर दिया।।।

कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने कहा कि किसी प्रशासनिक अधिकारी से इस तरह सीधे संवाद कर उनके संघर्ष और सफलता की कहानी सुनना उनके लिए अत्यंत प्रेरणादायी रहा। कलेक्टर द्वारा दिए गए व्यावहारिक सुझाव निश्चित रूप से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में उनके लिए मार्गदर्शक साबित होंगे। इस अवसर पर कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन अपने साथ प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित कई महत्वपूर्ण पुस्तकें भी लेकर पहुंचे।।।

उन्होंने बताया कि इन पुस्तकों का चयन उन्होंने स्वयं दिल्ली से किया है। विद्यार्थियों के हित को ध्यान में रखते हुए उन्होंने ये पुस्तकें जिला प्रेस क्लब सह वाचनालय, पेंड्रा को अध्ययन हेतु समर्पित कीं, ताकि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र-छात्राएं इनका लाभ उठा सकें। उनके इस प्रेरणादायी एवं विद्यार्थी हितैषी पहल की वाचनालय में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं तथा जिला प्रेस क्लब के सदस्यों ने सराहना करते हुए कलेक्टर का आभार व्यक्त किया गया था।।

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